जरूरत की खबर: क्या आपके पास दो वोटर आईडी हैं?
आज ही सरेंडर करें, जानें कानून और खतरे
परिचय
वोटर आईडी कार्ड न केवल मतदान का अधिकार देता है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण पहचान पत्र भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक व्यक्ति के पास दो वोटर आईडी कार्ड होना गैरकानूनी है? हाल ही में बिहार में राजद नेता तेजस्वी यादव के दो वोटर आईडी कार्ड होने का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में है। यदि आपके पास भी दो वोटर आईडी हैं, तो इसे तुरंत सरेंडर करना जरूरी है, अन्यथा आप कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं। आइए जानें क्या कहता है कानून और दो वोटर आईडी रखने के खतरे।
क्या कहता है भारतीय कानून?
भारत में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के तहत दो वोटर आईडी कार्ड रखना गैरकानूनी है। इस कानून की प्रमुख धाराएँ निम्नलिखित हैं:
- धारा 17 और 18: एक व्यक्ति का नाम केवल एक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो सकता है। दो या अधिक मतदाता सूचियों में नाम होना गैरकानूनी है।
- धारा 31: जानबूझकर गलत जानकारी देकर या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वोटर आईडी बनवाना या दो वोटर आईडी रखना चुनावी धोखाधड़ी माना जाता है।
- सजा का प्रावधान: यदि कोई व्यक्ति दो वोटर आईडी कार्ड रखता है या उनका उपयोग करता है, तो उसे एक साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है। गंभीर मामलों में वोटिंग का अधिकार भी अस्थायी रूप से निलंबित किया जा सकता है।
दो वोटर आईडी रखने के खतरे
दो वोटर आईडी रखना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
- कानूनी कार्रवाई: चुनाव आयोग द्वारा जांच के बाद आपको नोटिस जारी किया जा सकता है, और दोषी पाए जाने पर जेल या जुर्माना हो सकता है।
- चुनावी धोखाधड़ी का आरोप: दो वोटर आईडी का उपयोग मतदान में धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है, जिसे गंभीर अपराध माना जाता है।
- पहचान का दुरुपयोग: आपका दूसरा वोटर आईडी कोई और गलत तरीके से उपयोग कर सकता है, जिससे आपकी पहचान का दुरुपयोग हो सकता है।
- वोटर लिस्ट से नाम हटना: यदि दो वोटर आईडी का मामला सामने आता है, तो आपका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है, जिससे आप मतदान का अधिकार खो सकते हैं।
दो वोटर आईडी क्यों बन जाते हैं?
कई बार लोग अनजाने में या परिस्थितियों के कारण दो वोटर आईडी बनवा लेते हैं। इसके कुछ सामान्य कारण हैं:
- स्थान परिवर्तन: लोग अपने पैतृक स्थान से नौकरी या व्यवसाय के लिए दूसरे शहर जाते हैं और नया वोटर आईडी बनवा लेते हैं, बिना पुराना रद्द किए।
- प्रशासनिक गलती: कभी-कभी प्रशासनिक त्रुटियों के कारण एक व्यक्ति का नाम दो मतदाता सूचियों में दर्ज हो जाता है।
- जानकारी का अभाव: कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि दो वोटर आईडी रखना गैरकानूनी है।
- जानबूझकर धोखाधड़ी: कुछ लोग गलत इरादे से दो वोटर आईडी बनवाते हैं, जो गंभीर अपराध है।
दो वोटर आईडी को सरेंडर करने की प्रक्रिया
यदि आपके पास दो वोटर आईडी कार्ड हैं, तो आप निम्नलिखित तरीकों से एक को सरेंडर कर सकते हैं:
- ऑनलाइन प्रक्रिया:
- चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाएँ।
- लॉगिन करें या नया अकाउंट बनाएँ।
- फॉर्म 7 डाउनलोड करें और पुराने वोटर आईडी को रद्द करने के लिए आवश्यक जानकारी भरें।
- फॉर्म सबमिट करें और रेफरेंस नंबर नोट करें, जिससे आप स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।
- सत्यापन के लिए स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपसे संपर्क करेगा।
- ऑफलाइन प्रक्रिया:
- नजदीकी निर्वाचन कार्यालय, SDM ऑफिस, या BLO से संपर्क करें।
- फॉर्म 7 भरें, जिसमें उस वोटर आईडी का EPIC नंबर दें जिसे रद्द करना चाहते हैं।
- आवश्यक दस्तावेज (पहचान पत्र, पता प्रमाण) और 25 रुपये की फीस के साथ फॉर्म जमा करें।
- सत्यापन: फॉर्म जमा करने के बाद, BLO आपके पते पर सत्यापन के लिए आएगा। सत्यापन के बाद पुराना वोटर आईडी रद्द कर दिया जाएगा।
क्या करें यदि गलती से दो वोटर आईडी बन गए?
यदि अनजाने में आपके पास दो वोटर आईडी बन गए हैं, तो घबराएँ नहीं। तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएँ:
- चुनाव आयोग को सूचित करें और फॉर्म 7 के माध्यम से एक वोटर आईडी रद्द करवाएँ।
- यदि आपको संदेह है कि आपका नाम दो मतदाता सूचियों में है, तो अपनी स्थिति चेक करें।
- पुलिस में FIR दर्ज कराएँ यदि आपको लगता है कि दूसरा वोटर आईडी धोखाधड़ी से बनाया गया है।
निष्कर्ष
दो वोटर आईडी कार्ड रखना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह आपकी पहचान और मतदान के अधिकार को भी खतरे में डाल सकता है। यदि आपके पास दो वोटर आईडी हैं, तो तुरंत एक को सरेंडर करें, चाहे वह गलती से बना हो या जानबूझकर। चुनाव आयोग की वेबसाइट या स्थानीय निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से फॉर्म 7 भरकर आप आसानी से इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। सावधानी बरतें और कानूनी परेशानियों से बचें।
