पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक नहीं होगी! दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसल

📜 पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक नहीं होगी! दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला ⚖️

📜 पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक नहीं होगी! दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला ⚖️

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को रद्द किया, डीयू को राहत 🏛️

📅 प्रकाशित: 26 अगस्त 2025 | 🕒 अपडेट: 26 अगस्त 2025

📰 नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। ⚖️ यह फैसला निजता के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए लिया गया, जिससे दिल्ली विश्वविद्यालय को बड़ी राहत मिली है।

📚 विवाद की शुरुआत

यह मामला 2016 में शुरू हुआ जब आरटीआई कार्यकर्ता नीरज ने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1978 में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड मांगे थे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल था। 📝 सीआईसी ने 21 दिसंबर 2016 को विश्वविद्यालय को इन रिकॉर्ड्स की जांच की अनुमति देने का आदेश दिया था, यह तर्क देते हुए कि डिग्री से संबंधित जानकारी सार्वजनिक दस्तावेज है।

🔥 महत्वपूर्ण बात: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मूल अधिकार है, आरटीआई के तहत सूचना के अधिकार से ऊपर है। 🛡️

🏛️ कोर्ट का तर्क

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने 27 फरवरी 2025 को मामले पर फैसला सुरक्षित रखने के बाद 25 अगस्त को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महज जिज्ञासा या राजनीतिक कारणों के आधार पर निजी जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता। ⚖️ दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय छात्रों के रिकॉर्ड को एक विश्वासी जिम्मेदारी के तहत रखता है और इसे केवल जिज्ञासा के आधार पर सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

🗳️ राजनीतिक विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षिक योग्यताएं लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रही हैं। खासकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने उनकी डिग्रियों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं। 🗣️ 2016 में, AAP नेता और तत्कालीन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी से अपनी डिग्रियों को सार्वजनिक करने की मांग की थी। जवाब में, बीजेपी ने डिग्रियों की प्रतियां जारी कीं और दिल्ली विश्वविद्यालय ने उनकी वैधता की पुष्टि की थी। फिर भी, यह विवाद समय-समय पर सुर्खियों में रहा।

✅ डिग्री की जानकारी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनावी हलफनामे में बताया कि उन्होंने 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय से कला स्नातक (बीए) और 1983 में उसी विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री प्राप्त की। 📖 बीजेपी ने 2016 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी बीए और एमए की डिग्रियों की प्रतियां सार्वजनिक की थीं।

⚖️ कोर्ट का अंतिम फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विश्वविद्यालय को कोर्ट के समक्ष पीएम मोदी की डिग्री से जुड़े दस्तावेज पेश करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इन्हें आरटीआई के तहत 'अजनबियों द्वारा जांच' के लिए सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। 🏛️ कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ जिज्ञासा के आधार पर निजी जानकारी का खुलासा निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

🌐 भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है, क्योंकि आरटीआई कार्यकर्ता और विपक्षी दल इस मुद्दे को आगे बढ़ा सकते हैं। 🚪 हालांकि, कोर्ट के इस फैसले ने निजता के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह फैसला अन्य विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है।

🌟 क्या कहते हैं विशेषज्ञ: यह फैसला निजता के अधिकार और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन को दर्शाता है, जो भविष्य में अन्य मामलों में भी दिशानिर्देशक हो सकता है। 📚

🏁 निष्कर्ष

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। ⚖️ यह न केवल निजता के अधिकार को मजबूती देता है, बल्कि आरटीआई के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में भी एक कदम है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा या यह विवाद यहीं शांत हो जाएगा। 🕊️

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