सिब्बल का बयान: धनखड़ लापता, अमित शाह जवाब दें

सिब्बल का बयान: धनखड़ लापता, अमित शाह जवाब दें

सिब्बल का बयान: धनखड़ लापता, अमित शाह जवाब दें

8 अगस्त 2025 को दिया गया बयान, कोर्ट जाने की धमकी

परिचय

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने 8 अगस्त 2025 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के कथित तौर पर "लापता" होने का मुद्दा उठाया। सिब्बल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल स्पष्टीकरण देने की माँग की और चेतावनी दी कि यदि जवाब नहीं मिला तो विपक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस लेख में हम इस विवाद की पृष्ठभूमि, सिब्बल के दावों, और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा करेंगे।

क्या है विवाद?

कपिल सिब्बल ने 8 अगस्त 2025 को दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, और उनकी अनुपस्थिति के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति संवैधानिक पद की गरिमा और पारदर्शिता के लिए चिंता का विषय है। सिब्बल ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में तत्काल जानकारी देने की माँग की, और कहा कि यदि जवाब नहीं मिला तो विपक्ष सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा।

  • सिब्बल का आरोप: सिब्बल ने कहा, "उपराष्ट्रपति का लापता होना एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा है। जनता को यह जानने का हक है कि वह कहाँ हैं और उनकी अनुपस्थिति का कारण क्या है।"
  • विपक्ष का रुख: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।
  • सरकार का जवाब: अभी तक केंद्र सरकार या गृह मंत्रालय की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और कई महत्वपूर्ण विधेयक चर्चा में हैं। जगदीप धनखड़, जो उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति हैं, संसद की कार्यवाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी कथित अनुपस्थिति ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दिया है। सिब्बल का यह बयान हाल ही में विपक्ष द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दों, जैसे संसद में विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने के आरोपों, का हिस्सा माना जा रहा है।

कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि उपराष्ट्रपति किसी कारणवश अनुपस्थित हैं, तो इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक पदों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा कि यह जनता का अधिकार है कि उन्हें उच्च पदों पर बैठे लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी मिले।

संवैधानिक दृष्टिकोण

भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है। वह न केवल राज्यसभा का सभापति होता है, बल्कि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कर्तव्यों का निर्वहन भी करता है। यदि उपराष्ट्रपति किसी कारण से अनुपस्थित हैं, तो यह संवैधानिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठा सकता है। सिब्बल का कोर्ट जाने का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि विपक्ष इस मुद्दे को कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी में है।

  • कानूनी प्रक्रिया: यदि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख करता है, तो यह मामला जनहित याचिका (PIL) के रूप में दायर हो सकता है।
  • पारदर्शिता का सवाल: संवैधानिक पदों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।

सिब्बल के बयान का प्रभाव

8 अगस्त 2025 को दिए गए सिब्बल के बयान ने कई तरह की प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं:

  • राजनीतिक हलचल: विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिससे संसद में तनाव बढ़ सकता है।
  • सार्वजनिक चर्चा: सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें लोग उपराष्ट्रपति की अनुपस्थिति के कारणों पर अटकलें लगा रहे हैं।
  • सरकार पर दबाव: सरकार को इस मामले में जल्द स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है, अन्यथा यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

क्या हो सकता है अगला कदम?

इस विवाद के कई संभावित परिणाम हो सकते हैं:

  • सरकारी बयान: गृह मंत्रालय या उपराष्ट्रपति कार्यालय से जल्द ही आधिकारिक बयान आ सकता है, जिसमें धनखड़ की अनुपस्थिति का कारण बताया जाए।
  • विपक्ष की रणनीति: यदि कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता, तो विपक्ष संसद में हंगामा या कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है।
  • सार्वजनिक जागरूकता: यह मुद्दा संवैधानिक पदों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

निष्कर्ष

कपिल सिब्बल का 8 अगस्त 2025 को दिया गया बयान, जिसमें उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के "लापता" होने का दावा किया, एक गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष ने इस मामले को पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बनाकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। गृह मंत्री अमित शाह से जवाब की माँग और कोर्ट जाने की धमकी से यह विवाद और गहरा सकता है। यह देखना बाकी है कि सरकार इस मुद्दे पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मामला संसद से कोर्ट तक पहुंचेगा। इस बीच, यह मुद्दा जनता और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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