पाक PM की धमकी: एक बूंद पानी नहीं छीन सकता दुश्मन
48 घंटे में 3 पाकिस्तानी नेताओं के बयान, 12 अगस्त 2025 को शहबाज शरीफ का बयान
परिचय
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 12 अगस्त 2025 को एक समारोह में भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि "दुश्मन एक बूंद पानी भी नहीं छीन सकता" और यदि ऐसा करने की कोशिश की गई, तो "ऐसा सबक सिखाएंगे जो जिंदगीभर याद रहेगा।" यह बयान सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव के बीच आया है। पिछले 48 घंटों में पाकिस्तान के तीन प्रमुख नेताओं—आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर, विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो, और अब शहबाज शरीफ—ने भारत को धमकी दी है। इस लेख में हम इस विवाद की पृष्ठभूमि, बयानों का विश्लेषण, और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा करेंगे।
शहबाज शरीफ का बयान
12 अगस्त 2025 को पाकिस्तान के एक समारोह में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को "दुश्मन" करार देते हुए कहा, "हमारा एक बूंद पानी भी कोई नहीं छीन सकता। अगर आपने ऐसा करने की कोशिश की, तो हम आपको ऐसा सबक सिखाएंगे कि आप जिंदगीभर याद रखेंगे।" यह बयान सिंधु जल संधि को लेकर चल रही चर्चाओं और भारत द्वारा जल परियोजनाओं के विकास को लेकर दिया गया। शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी जल हिस्सेदारी की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
48 घंटे में तीन धमकियाँ
पिछले 48 घंटों में पाकिस्तान के तीन प्रमुख नेताओं ने भारत को धमकी दी है:
- जनरल असीम मुनीर (10 अगस्त 2025): पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि का उल्लंघन करने पर "कड़ा जवाब" दिया जाएगा।
- बिलावल भुट्टो (11 अगस्त 2025): विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत को चेतावनी दी कि जल संधि को तोड़ने की कोशिश "खतरनाक परिणाम" लाएगी।
- शहबाज शरीफ (12 अगस्त 2025): प्रधानमंत्री ने भारत को "दुश्मन" करार देते हुए पानी छीनने पर "जिंदगीभर याद रहने वाला सबक" सिखाने की धमकी दी।
ये बयान भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और बढ़ा रहे हैं, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर मतभेद हैं।
सिंधु जल संधि की पृष्ठभूमि
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता है। इसके तहत:
- जल बंटवारा: सतलज, रावी, और ब्यास नदियों का पानी भारत को, जबकि सिंधु, झेलम, और चिनाब नदियों का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया।
- परियोजनाएँ: भारत को अपनी नदियों पर सीमित जल विद्युत परियोजनाएँ बनाने का अधिकार है, लेकिन बिना बाधा के पानी का प्रवाह सुनिश्चित करना होता है।
- विवाद समाधान: दोनों देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) बनाया गया।
हाल के वर्षों में भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में जल परियोजनाओं, जैसे किशनगंगा और रतले हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, पर काम को लेकर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। पाकिस्तान का दावा है कि ये परियोजनाएँ संधि का उल्लंघन करती हैं, जबकि भारत का कहना है कि वह अपने अधिकारों के तहत कार्य कर रहा है।
पाकिस्तानी नेताओं की धमकियों का विश्लेषण
पाकिस्तान के नेताओं के लगातार भड़काऊ बयान कई कारणों से सामने आ रहे हैं:
- आंतरिक दबाव: पाकिस्तान में आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच सरकार जनता का ध्यान बाहरी मुद्दों पर केंद्रित करने की कोशिश कर रही है।
- संधि पर विवाद: पाकिस्तान का मानना है कि भारत की जल परियोजनाएँ उसके जल संसाधनों को प्रभावित कर रही हैं, खासकर पंजाब प्रांत में।
- क्षेत्रीय तनाव: कश्मीर और अन्य मुद्दों पर भारत-पाक तनाव को देखते हुए, ये बयान क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा हो सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ये बयान ज्यादातर आंतरिक राजनीति को मजबूत करने और जनता का समर्थन हासिल करने के लिए हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने अभी तक इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत सिंधु जल संधि का पूरी तरह पालन करता है और अपनी परियोजनाओं को संधि के दायरे में ही विकसित कर रहा है। भारत का कहना है कि वह पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन भड़काऊ बयानों से रिश्तों में सुधार नहीं हो सकता।
संभावित प्रभाव
पाकिस्तानी नेताओं के इन बयानों के कई प्रभाव हो सकते हैं:
- द्विपक्षीय तनाव: भारत-पाक संबंधों में और तनाव बढ़ सकता है, खासकर जब दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव है।
- अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता: पाकिस्तान इस मुद्दे को विश्व बैंक या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जा सकता है।
- क्षेत्रीय स्थिरता: लगातार भड़काऊ बयान दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का 12 अगस्त 2025 को दिया गया बयान, जिसमें उन्होंने भारत को "एक बूंद पानी" छीनने पर "जिंदगीभर याद रहने वाला सबक" सिखाने की धमकी दी, भारत-पाक संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर रहा है। पिछले 48 घंटों में जनरल असीम मुनीर और बिलावल भुट्टो के बयानों के बाद यह तीसरी धमकी है। यह विवाद सिंधु जल संधि के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो दोनों देशों के लिए संवेदनशील मुद्दा है। भारत ने अभी तक संयमित रुख अपनाया है, लेकिन यह देखना बाकी है कि यह तनाव किस दिशा में जाता है। दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीति ही इस विवाद का समाधान कर सकती है।
