तेलंगाना SBI ब्रांच में ₹13.71 करोड़ का घोटाला: कैशियर ने चुराया 20 किलो सोना और ₹1.1 करोड़ नकद

तेलंगाना SBI ब्रांच में ₹13.71 करोड़ का घोटाला: कैशियर ने चुराया 20 किलो सोना और ₹1.1 करोड़ नकद 😱

चेनूर, मंचेरियल, 30 अगस्त 2025: तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के चेनूर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में ₹13.71 करोड़ का भारी-भरकम घोटाला सामने आया है। इस सनसनीखेज मामले में बैंक के कैशियर नरिगे रविंदर ने 402 ग्राहकों को ठगते हुए 20.496 किलो सोना और ₹1.1 करोड़ नकद चुराया। इस घोटाले की प्रेरणा ۞web:0⁊। इस घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया और ग्राहकों में दहशत फैल गई। आइए, इस चौंकाने वाले मामले की पूरी कहानी जानते हैं। 🕵️‍♂️

🕵️‍♂️ घोटाले का खुलासा: कैसे हुआ इतना बड़ा फ्रॉड?

चेनूर पुलिस और बैंक अधिकारियों के अनुसार, यह घोटाला 22 मई 2025 को शुरू हुई तिमाही ऑडिट के दौरान सामने आया। ऑडिट में बैंक के नकदी और सोने के रिकॉर्ड में भारी अनियमितताएं पाई गईं। जांच में पता चला कि कैशियर नरिगे रविंदर ने पिछले 10 महीनों में सुनियोजित तरीके से ग्राहकों के पैसे और सोने को गबन किया। उसने अपने रिश्तेदारों, परिवार और दोस्तों के नाम पर गुप्त बैंक खाते खोले और ग्राहकों के जमा किए गए सोने और नकदी को इन खातों में स्थानांतरित कर दिया। 💸

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, “रविंदर ने 449 ग्राहकों द्वारा जमा किए गए 25.175 किलो सोने में से 20.496 किलो सोना और ₹1.1 करोड़ नकद चुराया। उसने इस राशि को विभिन्न फर्जी खातों में डाल दिया और ऑनलाइन सट्टेबाजी में भारी कर्ज भी उतारा।” 🕵️‍♂️

ऑडिट शुरू होने के बाद रविंदर अचानक गायब हो गया और उसका फोन बंद पाया गया। सीसीटीवी फुटेज, लेन-देन के रिकॉर्ड और फिंगरप्रिंट्स ने उसे इस घोटाले का मास्टरमाइंड साबित किया। 🖥️

🎬 ‘लकी भास्कर’ से प्रेरणा: सिनेमा और अपराध का कनेक्शन

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि रविंदर ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘लकी भास्कर’ से प्रेरणा लेकर इस घोटाले को अंजाम दिया। इस फिल्म में एक बैंक कर्मचारी धोखाधड़ी के जरिए जल्दी अमीर बनने की कोशिश करता है। जांचकर्ताओं का मानना है कि रविंदर ने इस किरदार की नकल करने की कोशिश की, यह सोचकर कि वह आसानी से धन इकट्ठा कर सकता है। 🎥

हालांकि, फिल्मी हीरो की तरह रविंदर भागने में कामयाब नहीं हुआ। पुलिस ने उसे वेमुलवाड़ा में पकड़ लिया, जहां उसने पहचान छिपाने के लिए अपना सिर मुंडवा लिया था। रविंदर की पत्नी और साली सहित नौ लोगों को इस मामले में सहायता करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 🚓

💸 नुकसान का आंकड़ा: ₹13.71 करोड़ का घोटाला

इस घोटाले में कुल ₹12.61 करोड़ का सोना और ₹1.1 करोड़ की नकदी गबन की गई। रविंदर ने 449 ग्राहकों द्वारा जमा किए गए 25.175 किलो सोने में से 20.496 किलो सोना चुराया और ₹1.1 करोड़ नकद को फर्जी खातों में डाल दिया। उसने चुराए गए धन का एक हिस्सा अन्य बैंकों और वित्तीय कंपनियों में निवेश किया और बाकी का उपयोग ऑनलाइन सट्टेबाजी के कर्ज चुकाने में किया। 📉

इस घटना ने बैंक की सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में सोना और नकदी का गबन इतने लंबे समय तक कैसे अनदेखा रहा? 🧐

😟 ग्राहकों में दहशत: बैंक का आश्वासन

इस घोटाले के सामने आने के बाद चेनूर की SBI शाखा के ग्राहकों में दहशत फैल गई। कई ग्राहकों ने अपनी जमा राशि और सोने की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। बैंक अधिकारियों, विशेष रूप से शाखा प्रबंधक, ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और ग्राहकों को आश्वासन दिया कि चुराए गए धन और सोने की वसूली के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। 🏦

बैंक ने यह भी वादा किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त आंतरिक जांच और सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। 💪

🕴️‍♂️ रविंदर का बैकग्राउंड: एक साधारण कर्मचारी की असाधारण साजिश

नरिगे रविंदर, जो एक बी.टेक स्नातक है और 2017 में SBI में कैशियर के रूप में शामिल हुआ था, ने अपनी साधारण छवि के पीछे एक जटिल धोखाधड़ी की साजिश रची। दो बच्चों का पिता होने के बावजूद, उसने ऑनलाइन सट्टेबाजी में भारी कर्ज जमा कर लिया था, जिसने उसे इस अपराध की ओर धकेल दिया। 🖱️

पुलिस का कहना है कि रविंदर ने अपने परिवार और दोस्तों को इस साजिश में शामिल किया, जिससे यह घोटाला और भी जटिल हो गया। इस मामले ने बैंक कर्मचारियों की भर्ती और निगरानी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं। 🔍

🚨 पुलिस की कार्रवाई: मैनहंट और गिरफ्तारियां

घोटाले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने रविंदर की तलाश के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया। विशेष पुलिस टीमों ने वेमुलवाड़ा में उसे पकड़ लिया, जहां वह पहचान छिपाने के लिए अपना सिर मुंडवाकर छिपा हुआ था। रविंदर के साथ-साथ उसकी पत्नी, साली और सात अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 🚓

रामागुंडम पुलिस आयुक्त अंबर किशोर झा, मंचेरियल डीसीपी भास्कर और जयपुर एसीपी वेंकटेश्वरलु के नेतृत्व में जांच तेजी से चल रही है। पुलिस रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल डेटा की गहन जांच कर रही है ताकि इस घोटाले के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। 📂

🗳️ सरकार और बैंक की जिम्मेदारी: आगे क्या?

इस घोटाले ने बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता के मुद्दों को उजागर किया है। चेनूर के स्थानीय मंत्री विवेक वेंकटस्वामी ने इस मामले में गहन जांच की मांग की है और अधिकारियों को ग्राहकों के हितों की रक्षा करने के निर्देश दिए हैं। 🏛️

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के घोटाले बैंकिंग प्रणाली में सख्त निगरानी और उन्नत तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ‘MuleHunter.AI’ जैसे टूल इस तरह के फर्जी खातों की पहचान में मदद कर सकते हैं। 🖥️

🌟 निष्कर्ष: भरोसे का संकट और भविष्य के सबक

चेनूर में SBI शाखा का यह घोटाला न केवल एक आर्थिक अपराध है, बल्कि यह ग्राहकों के भरोसे पर भी एक बड़ा सवाल है। ₹13.71 करोड़ के इस घोटाले ने बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है। ग्राहकों का विश्वास बहाल करने के लिए SBI को न केवल चुराए गए धन और सोने की वसूली करनी होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम भी उठाने होंगे। 💪

यह मामला हमें यह भी याद दिलाता है कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और आंतरिक निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। क्या इस तरह के घोटाले भविष्य में रोके जा सकेंगे? यह एक बड़ा सवाल है। 🧠 आप इस मामले के बारे में क्या सोचते हैं? अपनी राय कमेंट में साझा करें! 💬

Previous Post Next Post