मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की रहस्यमयी मौतों की जांच ने एक बड़ा खुलासा किया है। एमपी पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने चेन्नई से एस. रंगनाथन नामक फार्मा कंपनी डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उनकी कंपनी ने ऐसा जहरीला कफ सिरप बनाया जिससे अब तक दर्जनों मासूमों की जान जा चुकी है।
📍 प्रमुख बिंदु
- ☠️ Coldrif Cough Syrup में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक घातक रसायन पाया गया।
- 👶 24 बच्चों की मौत की पुष्टि; कई अन्य गंभीर रूप से बीमार।
- 🏢 कंपनी का मुख्यालय चेन्नई में स्थित है, SIT ने वहां छापेमारी की।
- ⚖️ रंगनाथन पर क़त्ल जैसे अपराध (Culpable Homicide) का केस दर्ज।
- 💊 दवा लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी को भी गिरफ्तार किया गया।
🔍 जांच कैसे आगे बढ़ी
➡️ शुरुआत में कुछ बच्चों की अचानक मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की।
➡️ लैब रिपोर्ट में सिरप के सैंपल में DEG की मात्रा 500 गुना अधिक मिली।
➡️ जांच में सामने आया कि दवा निर्माता कंपनी ने सुरक्षा परीक्षण में लापरवाही की।
➡️ SIT टीम ने चेन्नई जाकर कंपनी के दस्तावेज़, कच्चे माल के रिकॉर्ड जब्त किए।
⚠️ सरकार और नियामकों की कार्रवाई
- 🚫 कफ सिरप ब्रांड पर प्रतिबंध लगाया गया है।
- 🧪 सभी राज्यों को ऐसे उत्पादों के नमूने जांचने के निर्देश दिए गए हैं।
- 🏛 केंद्रीय दवा नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सभी फार्मा कंपनियों से जवाब मांगा।
- 📑 कई दवा फैक्ट्रियों में क्वालिटी टेस्टिंग में गड़बड़ी पाई गई।
🌍 अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
यह भारत में कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले गैंबिया और उज़्बेकिस्तान में भी भारतीय दवाओं से बच्चों की मौतें हुई थीं। अब यह मामला भारत की दवा निर्यात साख पर सवाल खड़ा कर रहा है।
📊 विशेषज्ञों की राय
- 🧬 विशेषज्ञों का कहना है कि DEG जैसे पदार्थ से शरीर में किडनी और लिवर फेल्योर हो सकता है।
- 🔬 हर बैच का केमिकल टेस्ट अनिवार्य है, परंतु कंपनी ने यह प्रक्रिया नहीं अपनाई।
- 👩⚕️ यह “निर्माण में चूक” और “सुरक्षा निरीक्षण की विफलता” दोनों का उदाहरण है।
📅 अगला कदम
- ⚖️ रंगनाथन को मध्य प्रदेश लाकर अदालत में पेश किया जाएगा।
- 📁 SIT जांच रिपोर्ट 15 दिनों में सरकार को सौंपेगी।
- 🧾 पीड़ित परिवारों को सरकारी मुआवजा देने पर विचार।
- 💬 स्वास्थ्य मंत्री ने कहा— “दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।”
🧾 अतिरिक्त जानकारी
- 🧱 कंपनी Sresan Pharmaceuticals तमिलनाडु में 15 साल से सक्रिय थी।
- 📦 दवा का वितरण नेटवर्क मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र तक फैला था।
- 💼 कंपनी के पास ISO और GMP सर्टिफिकेट होने का दावा किया गया था, पर अब वे जांच के दायरे में हैं।
- 📢 WHO और भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस घटना की अंतरराष्ट्रीय समीक्षा कर रहे हैं।
