RSS शताब्दी विजयादशमी उत्सव: मोहन भागवत ने हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी, शस्त्र पूजन किया; कोविंद मुख्य अतिथि

🏛️ RSS शताब्दी विजयादशमी उत्सव: मोहन भागवत ने हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी, शस्त्र पूजन किया; कोविंद मुख्य अतिथि

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने आज अपने शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव को भव्य रूप से मनाया। 🔥 नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की और शस्त्र पूजन किया। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहां उन्होंने संघ की परंपराओं की सराहना की। यह उत्सव RSS के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिसमें देशभर से हजारों स्वयंसेवक शामिल हुए। 📿

🙏 हेडगेवार को श्रद्धांजलि और शस्त्र पूजन का भावुक क्षण

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7:40 बजे हुई, जहां मोहन भागवत ने डॉ. हेडगेवार की समाधि पर जाकर पुष्प अर्पित किए। 💐 इसके बाद शस्त्र पूजन समारोह में भागवत ने तलवार, धनुष-बाण और अन्य प्रतीकात्मक शस्त्रों की पूजा की, जो RSS की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जागरण की भावना को दर्शाता है। यह परंपरा हर वर्ष विजयादशमी पर निभाई जाती है, लेकिन इस बार शताब्दी वर्ष होने से यह विशेष महत्व रखता है।

भागवत ने कहा कि हेडगेवार जी ने 1925 में RSS की नींव रखी, जो आज 83 हजार से अधिक शाखाओं के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है। दर्शकों में भावुकता का माहौल था, जब स्वयंसेवकों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। 🇮🇳

"डॉ. हेडगेवार जी का सपना था एक संगठित समाज का निर्माण। आज हम उनके आदर्शों पर चलते हुए शताब्दी वर्ष मना रहे हैं।" - मोहन भागवत, RSS प्रमुख 🙌

👨‍⚖️ पूर्व राष्ट्रपति कोविंद मुख्य अतिथि: संघ की सराहना

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शस्त्र पूजन किया और मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। कोविंद ने RSS की सामाजिक सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रशंसा की, कहा कि संघ ने स्वतंत्र भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने शताब्दी वर्ष को 'विजय का प्रतीक' बताया। 🎖️

कोविंद के भाषण में उन्होंने कहा कि RSS की शाखाएं न केवल शारीरिक प्रशिक्षण देती हैं, बल्कि चरित्र निर्माण भी करती हैं। कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्ति जैसे पूर्व अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।

  • कार्यक्रम समय: सुबह 7:40 बजे शुरू
  • भाग लेने वाले: 21,000 स्वयंसेवक
  • स्थान: रेशिमबाग मैदान, नागपुर
"RSS की शताब्दी एक मील का पत्थर है, जो राष्ट्र की प्रगति का प्रतीक है।" - राम नाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति 👏

🗣️ भागवत का संबोधन: पहलगाम हमले का जिक्र

मुख्य संबोधन में मोहन भागवत ने पहलगाम हमले का जिक्र किया, जहां आतंकियों ने धर्म पूछकर भारतीयों को निशाना बनाया। 😔 उन्होंने कहा कि देश को सतर्क रहना होगा और घुसपैठियों से चुनौतियां मिल रही हैं। भागवत ने संघ के कार्यकर्ताओं से एकता और सेवा का आह्वान किया।

भागवत ने शताब्दी वर्ष के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि RSS ने 100 वर्षों में समाज को मजबूत बनाया है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।

🇮🇳 पीएम मोदी का संदेश: घुसपैठियों से सतर्क रहें

कार्यक्रम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने RSS के शताब्दी वर्ष की बधाई दी। 🚀 मोदी ने कहा कि घुसपैठियों से चुनौतियां मिल रही हैं, इसलिए सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने संघ के पास आने वाले स्वयंसेवकों की सराहना की।

"संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र की रीढ़ हैं। शताब्दी वर्ष विजयी हो।" - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री 🇮🇳

🌟 देशभर में उत्सव: 83 हजार शाखाओं में कार्यक्रम

नागपुर के अलावा देश की 83 हजार शाखाओं में विजयादशमी मनाई गई। हर जगह शस्त्र पूजन, मार्च पास्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर राष्ट्रभक्ति के नारे लगाए। यह शताब्दी वर्ष RSS के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

  • शाखाओं की संख्या: 83,000+
  • मुख्य कार्यक्रम: नागपुर में 21,000 स्वयंसेवक
  • परंपरा: शस्त्र पूजन और हेडगेवार श्रद्धांजलि

💰 RSS को पहली बार मिला था 84 रुपए फंड, आज तक कोई बैंक खाता नहीं; कैसे काम करता है संघ

RSS की स्थापना के प्रारंभिक दिनों से ही इसका वित्तीय प्रबंधन अनोखा रहा है। 1928 में RSS ने पहली गुरुदक्षिणा उत्सव मनाया, जिसमें स्वयंसेवकों से कुल 84 रुपये का संग्रह हुआ। यह धनराशि संघ के प्रारंभिक कार्यों के लिए उपयोग की गई, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

आज भी RSS का कोई औपचारिक बैंक खाता नहीं है, जो इसकी स्वावलंबी प्रकृति को दर्शाता है। संगठन का कहना है कि सभी फंड निजी दान और स्वयंसेवकों की स्वैच्छिक योगदानों से आते हैं। सदस्यता मुफ्त है, और कोई बाहरी संगठन या सरकार से फंडिंग नहीं ली जाती।

संघ कैसे काम करता है? हर वर्ष व्यास पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) को गुरुदक्षिणा दिवस मनाया जाता है, जहां स्वयंसेवक स्वेच्छा से योगदान देते हैं। ये धनराशि शाखाओं के रखरखाव, सेवा कार्यों और प्रशिक्षण के लिए उपयोग होती है। RSS की पारदर्शिता का दावा है कि सभी खर्च स्थानीय स्तर पर प्रबंधित होते हैं, बिना केंद्रीकृत लेखा-जोखा के। यह मॉडल स्वयंसेवा और सामूहिक जिम्मेदारी पर आधारित है, जो संगठन को स्वतंत्र रखता है।

  • पहली गुरुदक्षिणा: 1928 में 84 रुपये
  • फंडिंग स्रोत: स्वयंसेवकों के दान, कोई बैंक खाता नहीं
  • वार्षिक आयोजन: गुरु पूर्णिमा पर योगदान
  • उपयोग: शाखाएं, सेवा कार्य, राष्ट्र निर्माण
"RSS का वित्तीय मॉडल स्वावलंबन और विश्वास पर टिका है।" - संघ के एक वरिष्ठ स्वयंसेवक

📰 प्रतिक्रियाएं: राजनीतिक हलकों में चर्चा

इस उत्सव ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण का आरोप लगाया, लेकिन भाजपा समर्थकों ने इसे सांस्कृतिक उत्सव बताया। पूर्व खिलाड़ी और कलाकारों ने भी सोशल मीडिया पर बधाई दी। 📱

विशेषज्ञों का कहना है कि RSS का शताब्दी वर्ष संगठन को नई ऊर्जा देगा।

"यह उत्सव RSS की मजबूती का प्रतीक है।" - सामाजिक कार्यकर्ता

🔮 भविष्य की योजनाएं: शताब्दी वर्ष का सफर

शताब्दी वर्ष 2025 से 2026 तक चलेगा, जिसमें विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। RSS ने सेवा कार्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया है। उम्मीद है कि यह वर्ष राष्ट्र को नई दिशा देगा। 🌍

  • अवधि: 2025-2026
  • फोकस: सेवा, शिक्षा, राष्ट्र निर्माण
  • उद्देश्य: समाज को मजबूत बनाना

कुल मिलाकर, आज का उत्सव RSS के गौरवशाली इतिहास का साक्षी बना। स्वयंसेवकों की एकजुटता ने सबको प्रभावित किया।

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