ताज़ा खबर • सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने CAQM से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है क्योंकि दिवाली की रात राजधानी के अधिकांश वायु‑मॉनिटरिंग स्टेशन सक्रिय नहीं थे — जिससे हवा के वास्तविक आंकड़ों पर सवाल उठ गए हैं। ⚖️📉
🔍 मुख्य बातें
- 💡 **कुल स्टेशन:** दिल्ली में 37 मॉनिटरिंग स्टेशन हैं — पर दिवाली की रात केवल 9 स्टेशन ही नियमित तरीके से काम कर रहे थे।
- 🗣️ **अमीकस की शिकायत:** वरिष्ठ अधिवक्ता और अमीकस क्यूरिए ने कोर्ट को बताया कि अगर स्टेशन काम नहीं कर रहे तो GRAP जैसे अहम कदम किस आधार पर लागू किए जाएंगे?
- 📄 कोर्ट ने CAQM और CPCB को कहा है कि वे यह स्पष्ट रिपोर्ट जमा करें कि किन कारणों से स्टेशन बंद थे और आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
😷 समस्या का मूल — डेटा की कमी
मॉनिटरिंग स्टेशन जब काम नहीं करते, तो मिलने वाला डेटा अधूरा और भरोसेमंद नहीं होता। इसका मतलब है:
- 📊 पूरे शहर के लिए सटीक AQI का आकलन मुश्किल।
- ⏳ प्रदूषण बढ़ने पर समय पर प्रवर्तन (GRAP) नहीं हो पाता।
- 🚨 सार्वजनिक स्वास्थ्य अलर्ट और चेतावनियाँ प्रभावित होती हैं — अस्थमा व श्वसन संबंधी रोग बढ़ सकते हैं।
⚖️ आज के कोर्ट‑रूम से
“अगर मॉनिटरिंग स्टेशन खुद बंद हैं, तो वायु‑गुणवत्ता पर कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी?” — सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने CAQM को एक हफ्ते के भीतर विस्तृत अफिडेविट देने का निर्देश दिया है। अफिडेविट में स्पष्ट किया जाना चाहिए कि:
- कितने स्टेशन काम कर रहे थे और किन कारणों से अन्य बंद थे।
- रख‑रखाव और तकनीकी दोषों के कारण हुई बंदी का विवरण।
- भविष्य में ऐसी कमी रोकने के लिए क्या नीतिगत और तकनीकी सुधार लागू किए जाएंगे।
🌱 सुधार के सुझाव
- 🔧 सभी मॉनिटरिंग स्टेशन की 24×7 कार्यक्षमता सुनिश्चत की जाए।
- 📈 डेटा‑एनालिटिक्स और स्वचालित अलर्ट सिस्टम को मजबूत किया जाए।
- 📲 आम जनता के लिए रियल‑टाइम AQI और अलर्ट पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराए जाएं।
- 🎇 त्योहारों के दौरान पटाखों और प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी और नियम लागू हों।
🔚 निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ तकनीक या आंकड़ों का नहीं — यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सरकारी जवाबदेही का है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब नजरें CAQM और CPCB की रिपोर्ट पर टिक गई हैं — क्या अगले त्योहार तक दिल्ली को साफ‑सुथरी हवा मिलेगी? 🤔
🔗 स्रोत देखें