टीम इंडिया की स्पॉन्सर Dream11 पर बैन का खतरा

टीम इंडिया की स्पॉन्सर Dream11 पर बैन का खतरा — दैनिक भास्कर शैली
लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल पास, रमी–पोकर पर भी रोक की तैयारी

लोकसभा ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग रेग्युलेशन बिल, 2025 पास कर दिया। इसके बाद देश में रीयल-मनी गेमिंग (जहां असली पैसों से खेल होता है) पर बैन का रास्ता साफ हो गया है। इस कदम से भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी स्पॉन्सर कंपनी Dream11 के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

बिल में क्या है खास
  • असली पैसों से खेलना अब अपराध—ऑनलाइन गेम में दांव लगाना/पैसे जमा करना प्रतिबंधित।
  • सज़ा: अधिकतम 3 साल जेल या ₹1 करोड़ तक जुर्माना।
  • विज्ञापन पर रोक: प्रचार करने पर 2 साल तक जेल या ₹50 लाख तक जुर्माना।
  • पेमेंट ब्लॉकेज: बैंकों/पेमेंट गेटवे को ऐसे प्लेटफॉर्म्स को सुविधा देने से रोका जाएगा।

क्रिकेट पर सीधा असर

Dream11 फिलहाल टीम इंडिया का मुख्य जर्सी स्पॉन्सर है। बिल लागू होने पर रीयल-मनी गेमिंग कंपनियों की गतिविधियाँ अवैध होने से स्पॉन्सरशिप, लीग रेवेन्यू और खिलाड़ियों के एंडोर्समेंट पर प्रभाव पड़ सकता है।

किसे होगा कितना नुकसान?
  • क्रिकेट इंडस्ट्री—स्पॉन्सरशिप और ब्रॉडकास्ट एड्स में गिरावट।
  • विज्ञापन जगत—रीयल-मनी गेमिंग एड्स बंद होने से बड़ा असर।
  • सरकार—टैक्स कलेक्शन पर दबाव, स्टार्टअप सेक्टर पर असर।
किसे होगा फायदा?
  • ई-स्पोर्ट्स—टूर्नामेंट/स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा।
  • शैक्षिक व स्किल-आधारित गेमिंग—सुरक्षित विकल्पों का विकास।
  • भारतीय गेम डेवलपर्स—नियमन के साथ निवेश और नवाचार के अवसर।
इंडस्ट्री की चिंता
  • गेमिंग निकायों का तर्क—ब्लैंकेट बैन से नौकरियों पर असर और यूज़र्स का ऑफशोर/अवैध प्लेटफ़ॉर्म्स की ओर रुख।
  • डिजिटल सुरक्षा और फ्रॉड का जोखिम बढ़ने की आशंका।

सरकार क्या कहती है

सरकार का कहना है कि रीयल-मनी गेमिंग ने युवाओं में लत, कर्ज और सामाजिक समस्याएँ बढ़ाई हैं। बिल का उद्देश्य इन जोखिमों को रोकना और एक जिम्मेदार, सुरक्षित डिजिटल गेमिंग माहौल बनाना है। साथ ही ई-स्पोर्ट्स, शैक्षिक गेम्स और गेम डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की बात भी शामिल है, जिसके लिए एक नियामक निकाय (प्रस्तावित) बनाया जा सकता है।

आगे की राह: बिल अब राज्यसभा में पेश होगा। पास होते ही भारत में Dream11 सहित सभी रीयल-मनी गेमिंग ऐप्स पर प्रतिबंध लागू हो सकता है।
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