NCERT किताब विवाद: जिन्ना, कांग्रेस-माउंटबेटन को विभाजन का दोषी बताया
परिचय
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की एक नई किताब ने 16 अगस्त 2025 को भारत में सियासी तूफान खड़ा कर दिया। किताब में भारत-पाकिस्तान विभाजन के लिए मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस, और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को सांप्रदायिकता फैलाने का दोषी बताया गया। इस किताब में जवाहरलाल नेहरू के एक बयान को भी शामिल किया गया, जिसके आधार पर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने इस किताब को "फाड़ देने" की मांग की और RSS को इतिहास का सबसे बड़ा विलेन करार दिया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषण ने इस विवाद को और हवा दी। इस लेख में हम इस विवाद की पृष्ठभूमि, नेताओं के बयानों, और संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
NCERT किताब का विवादास्पद दावा
NCERT की नई किताब, जो कक्षा 11 और 12 के इतिहास पाठ्यक्रम का हिस्सा है, में भारत के विभाजन को लेकर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। किताब में निम्नलिखित दावे किए गए हैं:
- जिन्ना की भूमिका: मोहम्मद अली जिन्ना ने अपनी "दो-राष्ट्र सिद्धांत" की नीति के कारण विभाजन को बढ़ावा दिया।
- कांग्रेस की जिम्मेदारी: कांग्रेस ने विभाजन को स्वीकार करने में जल्दबाजी दिखाई, जिससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ा।
- माउंटबेटन की योजना: लॉर्ड माउंटबेटन ने विभाजन की प्रक्रिया को तेजी से लागू किया, जिसके कारण व्यापक हिंसा और अव्यवस्था हुई।
- RSS का उल्लेख: RSS को सांप्रदायिकता फैलाने और विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार करने में भूमिका के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
इसके अलावा, किताब में जवाहरलाल नेहरू के एक बयान को शामिल किया गया है, जो उन्होंने 1951 में तत्कालीन मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में दिया था। इस बयान में नेहरू ने कहा था, "यदि संविधान हमारे रास्ते में आता है, तो हम इसमें आवश्यक बदलाव लाएंगे।" इस बयान को किताब में संदर्भित करते हुए दावा किया गया कि नेहरू ने संविधान को बदलने की मंशा जताई, जिसे विभाजन के समय की उनकी नीतियों से जोड़ा गया।
प्रधानमंत्री मोदी का भाषण
14 दिसंबर 2024 को लोकसभा में संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेहरू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "पंडित नेहरू ने संविधान को बदलने की वकालत की थी। उन्होंने 1951 में मुख्यमंत्रियों को लिखा कि अगर संविधान रास्ते में आए, तो इसे बदला जाएगा। यह संविधान निर्माताओं का अपमान था।" पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता की भूख में संविधान को बार-बार नुकसान पहुँचाया और नेहरू ने 1947 से 1952 तक बिना चुनी हुई सरकार के दौरान संविधान में संशोधन किया।
मोदी के इस बयान ने NCERT किताब में शामिल नेहरू के बयान को और विवादास्पद बना दिया, क्योंकि यह किताब के दावों को मजबूत करता प्रतीत होता है।
प्रमुख नेताओं के बयान
16 अगस्त 2025 को इस विवाद पर कई नेताओं ने तीखे बयान दिए, जिसने इसे और गर्म कर दिया:
- पवन खेड़ा (कांग्रेस प्रवक्ता): खेड़ा ने NCERT की किताब को "इतिहास का विकृतिकरण" करार दिया और कहा, "इस किताब को फाड़ देना चाहिए। यह किताब RSS के इशारे पर लिखी गई है। विभाजन का कारण हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग का गठजोड़ था। RSS इतिहास का सबसे बड़ा विलेन है, जिसने 25 साल तक जासूसी की और जिन्ना के साथ सांठगांठ की।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जिन्ना के मकबरे पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।
- जयराम रमेश (कांग्रेस महासचिव): रमेश ने किताब को "संवैधानिक मूल्यों का अपमान" बताया और ट्वीट किया, "NCERT की किताबें अब RSS के प्रचार का साधन बन गई हैं। यह किताब स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस की भूमिका को कमजोर करती है।" उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से किताब की समीक्षा और इसे हटाने की मांग की।
- शहजाद पूनावाला (BJP प्रवक्ता): पूनावाला ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा, "कांग्रेस इतिहास से भाग रही है, जब यह उनके लिए सुविधाजनक नहीं है। तथ्य यह है कि विभाजन के समय सत्ता में कौन था? मुस्लिम लीग, नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस, और माउंटबेटन। विभाजन को रोकने की शक्ति इन्हीं के पास थी। नेहरू के बयान विभाजन के समर्थन में थे।"
- RSS का बयान: RSS ने कहा, "NCERT की किताब में हमारी भूमिका को गलत तरीके से पेश किया गया है, लेकिन यह किताब तथ्य-आधारित है और विभाजन की सच्चाई को सामने लाती है।"
विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत-पाकिस्तान का विभाजन 1947 में हुआ, जब ब्रिटिश शासन ने भारत को दो राष्ट्रों में बाँट दिया। इस दौरान लाखों लोग विस्थापित हुए और सांप्रदायिक हिंसा में हजारों की जान गई। विभाजन के लिए कई कारकों को जिम्मेदार माना जाता है:
- दो-राष्ट्र सिद्धांत: जिन्ना और मुस्लिम लीग ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लिए अलग राष्ट्र की मांग की।
- कांग्रेस की रणनीति: कुछ इतिहासकारों का मानना है कि कांग्रेस ने सत्ता हस्तांतरण में जल्दबाजी दिखाई।
- माउंटबेटन की भूमिका: लॉर्ड माउंटबेटन ने जून 1947 में विभाजन की योजना को तेजी से लागू किया, जिसके कारण अव्यवस्था बढ़ी।
- सांप्रदायिक तनाव: RSS और अन्य संगठनों पर सांप्रदायिकता भड़काने के आरोप लगे, हालांकि ये दावे विवादास्पद हैं।
विवाद का प्रभाव
इस विवाद ने कई क्षेत्रों पर प्रभाव डाला है:
- शिक्षा पर बहस: यह विवाद शिक्षा में इतिहास की व्याख्या और वैचारिक प्रभाव के सवाल को सामने लाता है।
- राजनीतिक तनाव: पवन खेड़ा और जयराम रमेश जैसे कांग्रेस नेताओं के बयानों और BJP-RSS के जवाबों ने संसद के मानसून सत्र में हंगामे की आशंका बढ़ा दी है।
- सामाजिक प्रभाव: सोशल मीडिया पर #NCERTControversy ट्रेंड कर रहा है, जहाँ लोग इतिहास के पुनर्लेखन पर सवाल उठा रहे हैं।
- छात्रों पर असर: NCERT किताबें लाखों छात्रों तक पहुँचती हैं, और इस विवाद से उनके दृष्टिकोण पर प्रभाव पड़ सकता है।
आगे की राह
इस विवाद के समाधान के लिए कई कदम संभव हैं:
- NCERT की समीक्षा: सरकार NCERT को किताब की सामग्री की समीक्षा करने का निर्देश दे सकती है।
- विशेषज्ञों की समिति: इतिहासकारों और शिक्षाविदों की एक समिति गठित की जा सकती है जो किताब के तथ्यों की जाँच करे।
- सार्वजनिक बहस: इस मुद्दे पर खुली चर्चा आयोजित की जा सकती है, जिसमें सभी पक्षों के विचार सुने जाएँ।
निष्कर्ष
16 अगस्त 2025 को सामने आए NCERT की किताब के विवाद ने भारत में इतिहास की व्याख्या को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। किताब में जिन्ना, कांग्रेस, और माउंटबेटन को विभाजन का दोषी ठहराने और नेहरू के 1951 के बयान को शामिल करने से विवाद बढ़ा। पीएम मोदी के हालिया भाषण ने इस दावे को और हवा दी। कांग्रेस नेताओं पवन खेड़ा और जयराम रमेश ने किताब को फाड़ने की मांग की, जबकि BJP और RSS ने इसका बचाव किया। यह विवाद शिक्षा, इतिहास, और राजनीति के बीच जटिल संबंधों को उजागर करता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे का समाधान कैसे होता है और यह भारतीय शिक्षा प्रणाली को कैसे प्रभावित करता है।
