काठमांडू, 10 सितंबर 2025: नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए Gen-Z आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर भाग गए। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल के घर पर हमला किया, जिसमें उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की जलकर मृत्यु हो गई। 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल होने के बाद नेपाल में अराजकता का माहौल है। यह घटना भारत के पड़ोस में श्रीलंका और बांग्लादेश के बाद तीसरा तख्तापलट है, जो एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाता है। भारत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। 🛑 इस लेख में हम नेपाल के हालात, भारत के पड़ोस में तख्तापलट के कारण और भविष्य पर चर्चा करेंगे।
🔥 नेपाल में हिंसा: क्या हुआ?
8 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, व्हाट्सएप और यूट्यूब सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले के खिलाफ Gen-Z के नेतृत्व में हजारों युवा काठमांडू, ललितपुर और अन्य शहरों में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बेरोजगारी के खिलाफ भी नाराज थे। सोमवार को स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुस गए, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछारें और गोलियां चलाईं।
मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल के घर में आग लगा दी, जिसमें उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार की मृत्यु हो गई। भीड़ ने केपी शर्मा ओली, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, और पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल (प्रचंड) और शेर बहादुर देउबा की संपत्तियों को भी निशाना बनाया। काठमांडू में कर्फ्यू और सेना की तैनाती के बावजूद हिंसा रुकी नहीं, और ओली ने 9 सितंबर को इस्तीफा दे दिया।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने कहा, “सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।” 😔
🏃♂️ पीएम ओली क्यों भागे?
केपी शर्मा ओली, जो जुलाई 2024 में नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे, ने हिंसक प्रदर्शनों और जनता के गुस्से के बाद इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर भाग गए। उनके पैतृक घर को भी प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया। नेपाल के मीडिया ने इसे “लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे खूनी दिन” करार दिया, जिसमें पुलिस और ओली समर्थकों पर प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आरोप लगा। ओली के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी इस्तीफा दे दिया, जिससे देश में नेतृत्व का संकट गहरा गया है।
ओली को एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाना जाता था, लेकिन उनके आलोचकों का कहना था कि वह भारत के खिलाफ रुख अपनाते थे और सत्ता में बने रहने के लिए तिकड़म करते थे। उनके नेतृत्व में सोशल मीडिया बैन का फैसला जनता के गुस्से का मुख्य कारण बना।
🗳️ भारत के पड़ोस में तख्तापलट का पैटर्न
पिछले चार सालों में भारत के पड़ोसी देशों—श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल—में तख्तापलट और अस्थिरता की घटनाएं एक समान पैटर्न दर्शाती हैं। इन देशों में जनता का गुस्सा, खासकर युवाओं का आंदोलन, सत्ता परिवर्तन का कारण बना है:
- श्रीलंका (2022): आर्थिक संकट और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शनों ने राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया।
- बांग्लादेश (2024): मई 2024 में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन ने शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका।
- नेपाल (2025): सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ Gen-Z आंदोलन ने ओली की सरकार को गिरा दिया।
पूर्व भारतीय राजनयिक वेणु राजामणि ने कहा, “नेपाल में जो हो रहा है, वह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि चिंताजनक भी है। भारत को इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।” यह पैटर्न दक्षिण एशिया में अस्थिरता का संकेत देता है, जिसमें म्यांमार और पाकिस्तान भी अस्थिर हैं।
🕵️♂️ तख्तापलट के कारण: क्या है जड़ में?
भारत के पड़ोस में तख्तापलट का यह पैटर्न कई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारकों का परिणाम है:
- आर्थिक संकट और बेरोजगारी: नेपाल में 40% से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जिसने Gen-Z को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। श्रीलंका और बांग्लादेश में भी आर्थिक संकट ने जनता के गुस्से को भड़काया।
- भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद: नेपाल में प्रदर्शनकारी सरकार पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हैं। यह मुद्दा बांग्लादेश और श्रीलंका में भी प्रमुख था।
- सोशल मीडिया और Gen-Z की ताकत: नेपाल में सोशल मीडिया बैन ने युवाओं को संगठित करने में अहम भूमिका निभाई। बांग्लादेश में भी सोशल मीडिया ने आंदोलन को तेज किया।
- बाहरी प्रभाव: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी ताकतें, खासकर चीन और पश्चिमी देश, इन आंदोलनों को हवा दे सकते हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
नेपाल में सोशल मीडिया बैन ने आंदोलन को और भड़काया, क्योंकि यह Gen-Z के लिए अभिव्यक्ति का मुख्य साधन था।
🇮🇳 भारत की प्रतिक्रिया और चिंताएं
भारत ने नेपाल की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने X पोस्ट में कहा, “नेपाल की घटनाएं बेहद दर्दनाक हैं, खासकर इसलिए कि कई युवा अपनी जान गंवा चुके हैं।” उन्होंने शांति और संयम की अपील की। भारत ने नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की और सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल के पानीटंकी और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
नेपाल-भारत सीमा पर व्यापार प्रभावित हुआ है, और त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास आगजनी से भारतीय उड़ानें डायवर्ट या रद्द हुई हैं।
🔮 नेपाल में आगे क्या?
नेपाल में नेतृत्व का संकट गहरा गया है। ओली और राष्ट्रपति पौडेल के इस्तीफे के बाद नई सरकार के गठन का रास्ता अस्पष्ट है। नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा या पुष्प कमल दहल (प्रचंड) अगले पीएम के दावेदार हो सकते हैं, लेकिन जनता का गुस्सा और हिंसा नई सरकार के लिए चुनौती होगी।
नेपाल में हिंसा को रोकने के लिए सेना और पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है, लेकिन Gen-Z का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि नई सरकार को भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया जैसे मुद्दों पर तुरंत काम करना होगा।
🌐 क्षेत्रीय प्रभाव और भारत के लिए सबक
नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में तख्तापलट का यह पैटर्न भारत के लिए चेतावनी है। पूर्व राजनयिक अचल मल्होत्रा ने कहा, “भारत को अपने पड़ोस में अस्थिरता पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार के लिए खतरा है।” भारत और नेपाल के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते हैं, और नेपाल की अस्थिरता से भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में नई सरकार के गठन में चीन की भूमिका बढ़ सकती है, जैसा कि प्रचंड और ओली के पिछले कार्यकालों में देखा गया। भारत को कूटनीतिक रूप से सक्रिय रहना होगा ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।
🌟 निष्कर्ष: अस्थिरता का दौर
नेपाल में तख्तापलट और हिंसा ने दक्षिण एशिया में अस्थिरता के एक नए दौर को उजागर किया है। सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी ने Gen-Z को सड़कों पर ला दिया, जिसने सत्ता को उखाड़ फेंका। भारत के पड़ोस में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में एक ही पैटर्न—युवा आंदोलन, हिंसा और नेताओं का भागना—दिखाई देता है। यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर सवाल उठाता है।
नेपाल में शांति और स्थिरता के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? क्या भारत को और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए? अपनी राय कमेंट में साझा करें! 💬
