15 अगस्त: पीएम लाल किले से क्यों फहराते हैं तिरंगा?

15 अगस्त: लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति

15 अगस्त: लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति

15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस और पाकिस्तान का पहला जश्न

परिचय

15 अगस्त 2025 को भारत अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे और राष्ट्र को संबोधित करेंगे। यह परंपरा 1947 से चली आ रही है और भारत की आजादी का प्रतीक है। लेकिन कई लोग यह सवाल उठाते हैं कि लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा क्यों शुरू हुई और राष्ट्रपति इस समारोह में शामिल क्यों नहीं होते? साथ ही, क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान ने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस का जश्न कहाँ मनाया था? इस लेख में हम इन सवालों के जवाब विस्तार से देंगे और स्वतंत्रता दिवस की परंपराओं के ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व को समझेंगे।

लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा: ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक महत्व

लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा 15 अगस्त 1947 को शुरू हुई थी, जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यह परंपरा आज तक कायम है और इसके पीछे कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, और प्रतीकात्मक कारण हैं:

  1. ऐतिहासिक महत्व: लाल किला, जो मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा 17वीं शताब्दी में बनवाया गया, भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। 1857 की पहली स्वतंत्रता क्रांति में लाल किला स्वतंत्रता सेनानियों का केंद्र था। 1947 में, जब भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ, लाल किले से तिरंगा फहराना आजादी की जीत का प्रतीक बन गया।
  2. राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: लाल किला दिल्ली में स्थित है, जो भारत की राजधानी और सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ से तिरंगा फहराने और राष्ट्र को संबोधित करने से पूरे देश को एकजुट करने का संदेश जाता है।
  3. प्रधानमंत्री की भूमिका: भारतीय संविधान के अनुसार, प्रधानमंत्री देश का कार्यकारी प्रमुख होता है। लाल किले से तिरंगा फहराना और राष्ट्र को संबोधन देना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। यह संबोधन सरकार की नीतियों, उपलब्धियों, और भविष्य की योजनाओं को जनता तक पहुँचाने का मंच है।
  4. औपनिवेशिक शासन का अंत: लाल किला, जो कभी मुगल और फिर ब्रिटिश शासन का प्रतीक था, आजादी के बाद स्वतंत्र भारत की शक्ति और संप्रभुता का प्रतीक बन गया। तिरंगा फहराना औपनिवेशिक शासन के अंत और नए भारत की शुरुआत को दर्शाता है।
  5. परंपरा का निरंतरता: 1947 से हर साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से तिरंगा फहराया जाता है। यह परंपरा अब भारत की राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा है।

15 अगस्त 2025 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12वीं बार लाल किले से तिरंगा फहराएंगे। इस बार का संबोधन "विकसित भारत" थीम पर केंद्रित होगा, जो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दर्शाता है।

राष्ट्रपति क्यों शामिल नहीं होते?

लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के समारोह में राष्ट्रपति की अनुपस्थिति कई लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय रही है। इसके पीछे संवैधानिक और प्रोटोकॉल से जुड़े कारण हैं:

  1. संवैधानिक भूमिका: भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख (Head of State) होता है, जबकि प्रधानमंत्री कार्यकारी प्रमुख (Head of Government) होता है। लाल किले का समारोह एक सरकारी आयोजन है, जिसमें सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाता है। यह जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की होती है।
  2. अलग समारोह: राष्ट्रपति स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। 14 अगस्त 2025 को, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में देश की एकता, विविधता, और प्रगति पर जोर दिया। यह संबोधन संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका को दर्शाता है।
  3. प्रोटोकॉल का पालन: लाल किले का समारोह एक सरकारी आयोजन है, जिसमें प्रधानमंत्री मुख्य भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस आयोजन को औपचारिक रूप से बदल सकती है, जिससे प्रोटोकॉल में जटिलता आ सकती है।
  4. गणतंत्र दिवस की भूमिका: गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और राजपथ पर परेड की सलामी लेते हैं। यह आयोजन संवैधानिक उत्सव है, जो राष्ट्रपति की भूमिका को रेखांकित करता है। इसके विपरीत, स्वतंत्रता दिवस का आयोजन सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित होता है।
  5. ऐतिहासिक परंपरा: 1947 में जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से तिरंगा फहराया था, और तब से यह परंपरा प्रधानमंत्री के साथ जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति इस परंपरा का हिस्सा बन गई है।

इसलिए, राष्ट्रपति का लाल किले के समारोह में शामिल न होना संवैधानिक और ऐतिहासिक प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

पाकिस्तान का पहला स्वतंत्रता दिवस: कहाँ मनाया गया?

पाकिस्तान ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त 1947 को मनाया। इस दिन, कराची में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जो उस समय पाकिस्तान की राजधानी थी।

  • कराची में जश्न: मोहम्मद अली जिन्ना, पाकिस्तान के संस्थापक और पहले गवर्नर-जनरल, ने कराची के गवर्नमेंट हाउस (अब कायद-ए-आजम हाउस) में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यह समारोह देश की नई शुरुआत का प्रतीक था।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: 1947 में भारत और पाकिस्तान का बंटवारा ताजा था। कराची में आयोजित समारोह के दौरान शरणार्थी संकट और हिंसा की चुनौतियाँ थीं, लेकिन यह दिन पाकिस्तानियों के लिए गर्व और आशा का प्रतीक था।
  • आधुनिक परंपराएँ: आज, पाकिस्तान में स्वतंत्रता दिवस पर इस्लामाबाद और कराची में झंडा फहराने, सैन्य परेड, आतिशबाजी, और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

पाकिस्तान का पहला स्वतंत्रता दिवस कराची में मनाया गया, जो उस समय देश का प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र था।

स्वतंत्रता दिवस 2025: भारत में उत्सव

15 अगस्त 2025 को भारत में स्वतंत्रता दिवस का उत्साह चरम पर है। लाल किले पर आयोजित समारोह इस दिन का मुख्य आकर्षण है, लेकिन देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं:

  • लाल किला समारोह: सुबह 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तिरंगा फहराएंगे, इसके बाद 90 मिनट का संबोधन होगा। इस साल की थीम "विकसित भारत" है, जो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दर्शाती है।
  • सुरक्षा व्यवस्था: दिल्ली में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी, ड्रोन निगरानी, और मल्टीलेयर सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है।
  • राष्ट्रीय उत्सव: स्कूलों, कॉलेजों, और सरकारी कार्यालयों में तिरंगा फहराया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत, और नाटक आयोजित किए जा रहे हैं।
  • सामाजिक पहल: सरकार ने स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की अपील की है।

लाल किले के समारोह की विशेषताएँ

लाल किले का समारोह केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं है। यह एक व्यापक आयोजन है, जिसमें कई तत्व शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय ध्वज फहराना: समारोह की शुरुआत तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान से होती है।
  • प्रधानमंत्री का संबोधन: पीएम अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियाँ, जैसे आर्थिक विकास, डिजिटल इंडिया, और आत्मनिर्भर भारत, पर चर्चा करते हैं।
  • सैन्य सम्मान: तिरंगे को 21 तोपों की सलामी दी जाती है, और सैन्य टुकड़ियाँ परेड करती हैं।
  • सांस्कृतिक प्रदर्शन: स्कूली बच्चे और सांस्कृतिक दल देशभक्ति गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हैं।

इस साल, 15 अगस्त 2025 को, समारोह में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, जैसे वर्चुअल प्रसारण और सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग।

निष्कर्ष

15 अगस्त 2025 को भारत अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, और लाल किले से तिरंगा फहराने की परंपरा इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह परंपरा 1947 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा शुरू की गई थी और आज भी राष्ट्रीय एकता और गर्व का प्रतीक है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति संवैधानिक प्रोटोकॉल और परंपरा का हिस्सा है, जो इस आयोजन को सरकार का मंच बनाती है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस कराची में मनाया, जो उनके इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण था। यह दिन हमें आजादी की कीमत और देश के प्रति जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

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